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*ABHIJEET RANE (AR)*

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जनता के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे जी: एकदम सच है। शिंदे जी ने खुद कहा कि वह राज्य के लोगों को न्याय दिलाने के लिए अपने मुख्यमंत्री पद का इस्तेमाल करेंगे और आम नागरिकों के जीवन में अच्छे दिन लाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हम बालासाहेब के हिंदुत्व और धर्मवीर आनंद दिघे की शिक्षाओं को आगे बढ़ाएंगे। जय हो।

 

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इन चार गुरूमन्त्रों से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपना करिश्मा दिखाएंगे: हिंदुत्व की प्रतिष्ठा, अंडरवर्ल्ड का विनाश, मराठा आरक्षण कार्यान्वयन तथा राज्य का चहुमुखी विकास। दिल्ली से यही 4 गुरुमंत्र लेकर एकनाथ शिंदे आने वाले दिनों में इन्हीं मुद्दों के सहारे उद्धव ठाकरे की राजनीतिक जमीन को खिसकाने की कोशिश करेंगे।

 

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मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मराठा आरक्षण के मुद्दे को हल करने के प्रति काफी गंभीर है। दिल्ली दौरे के दौरान शिंदे ने सॉलिसिटर जनरल से इसी मुद्दे के संदर्भ मे मुलाकात की। मुलाकात की वजह के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए शिंदे ने बताया कि उन्होंने सॉलिसिटर जनरल के साथ मुलाकात के दौरान मराठा आरक्षण को लेकर चर्चा की। इसका साफ साफ मतलब यह है कि जो काम पूर्ववर्ती सरकारें नहीं कर पाई, उसे शिंदे सरकार करने के प्रति प्रतिबद्ध नजर आती है।

 

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जो कहते हैं, मुख्यमंत्री शिंदे जी वही करते भी हैं। उनकी कथनी और करनी में अंतर नहीं है।विधानसभा में बहुमत सिद्ध करने के बाद उन्होंने अपने काम करने का तरीका बताते हुए कहा था कि मुझे जिस भी जिले से शिकायत मिलेगी मैं वहां के जिलाधिकारी को फोन कर तुरंत काम करवाउंगा। इसे शिंदे ने कर दिखाया है। अपनी इस बात को कायम रखते हुए मुख्यमंत्री शिंदे ने जिलाधिकारियों की फोन पर ही क्लास लेनी शुरू कर दी है।

 

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महा विकास आघाड़ी सरकार के सूत्रधार एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने के अगले ही दिन आयकर विभाग की ओर से नोटिस भेजा गया था। शरद पवार ने इस नोटिस को जरूर 'प्रेम पत्र' बताया था। आयकर विभाग का ये नोटिस 2004, 2009, 2014 और 2020 में चुनावी हलफनामों के संबंध में भेजा गया है। पवार ने इसे केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का मामला कहा था। सच्चाई तो जांच के बाद ही सामने आएगी। लेकिन ये सच है कि भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में एनसीपी कई नेताओं का रिकॉर्ड बहुत ही खराब रहा है।

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