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*ABHIJEET RANE (AR)*

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शिवसेना की इतनी बुरी दशा कभी नहीं थी। ये अच्छा है कि यह सब हिन्दू ह्रदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे के समय नहीं हुआ। लेकिन उद्धव ठाकरे के आते ही शिवसेना के बुरे दिन शुरू हो गए। इन दिनों तो उद्धव ठाकरे के राजनीतिक करियर के पतन का दौर जारी है। लिहाजा पतन के प्रतिदिन रोज नए अध्याय लिखे जा रहे हैं।

 

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मानसून सत्र के दौरान उप राष्ट्रपति चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे को एक और झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष ने शिंदे गुट के सांसद राहुल शेवाले को बड़ी राहत दी है। उद्धव गुट से बागी होने के बाद शिंदे गुट में शामिल होने वाले राहुल शेवाले को लोकसभा में शिवसेना के नेता के तौर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मान्यता दे दी है।

 

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एकनाथ शिंदे को शिवसेना के 19 लोकसभा सदस्यों में से 12 का समर्थन प्राप्त है और इन्हीं 12 सांसदों ने बीते दिनों लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर शेवाले को संसद के निचले सदन में पार्टी का नेता नियुक्त करने का अनुरोध किया था। शिवसेना सांसदों ने मांग करते हुए कहा था कि निवर्तमान नेता विनायक राउत में उन्हें भरोसा नहीं रह गया है। शिंदे ने भी शेवाले को लोकसभा में पार्टी का नेता नामित किया था।

 

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लोकसभा के बाद चुनाव आयोग! शिवसेना में एकनाथ शिंदे गुट ने पार्टी पर पूर्ण अधिकार को लेकर चुनाव आयोग एक पत्र लिखा है। पत्र में शिंदे गुट की तरफ से दावा किया गया है कि उनके पास बहुमत है, ऐसे में शिवसेना पर उनका पूरी तरह से अधिकार है। जबकि उद्धव ठाकरे गुट पहले ही निर्वाचन आयोग को ऐसी ही चिट्ठी भेज चुका है। देखते हैं कि आयोग क्या फैसला लेता है?

 

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विलेन एनसीपी है!!! राज्य में सियासी तनाव के बीच बयानबाजी का दौर जारी है। अब एनसीपी ने शिवसेना के बागी विधायकों को ‘जुबान संभालने’ की हिदायत भी दे दी है। खास बात है कि कई विधायक शिवसेना की स्थिति को लेकर एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर सवाल उठा रहे हैं। हाल ही में शिवसेना से निकाले गए रामदास कदम ने भी पवार परिवार पर आरोप लगाए थे।

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